बीटी कोटन के खेत में बाल मजदूर
गुरुवार, 25 अप्रैल 2013
अगरबत्तियां बांटो, बालमजदूरी खत्म करो
कैसे खेलेगा बचपन?
रास्ते की एक तरफ स्कुल, दूसरी तरफ क्रिंडागण,
गांव डागला, तहेसील विजयनगर
किसी भी रास्ते के आसपास कोई स्कुल है तो "यहां नजदीक में स्कुल
है" ऐसी चेतावनी आप देखेंगे. मगर आप गुजरात के आदिवासी क्षेत्र से गुजर रहे हैं
तो आपको ऐसा कोई ट्राफीक साइन बोर्ड देखने को नहीं मिलेगा और आप ने रास्ते के एक तरफ प्राइमरी स्कुल और रास्ते की दूसरी तरफ बच्चों का
खेल का ऐसा मैदान भी देख लिया तो भी परेशान मत होना. गुजरात के साबरकांठा जीले के
विजयनगर तहसील में कई गांवो में ऐसा नज़ारा एक आम बात है.
शुक्रवार, 2 नवंबर 2012
हमारा भविष्य
He or she may not be your own child.
but they are creating your vibrant Gujarat by sacrificing their study
and often their lives. they are creating your 'middle class' heaven
where you are comfortable with your conscience.
अगर
ये बच्चे कल अपने मालिकों को मार डालेंगे, डाइनेमाइट लेकर इस समाज की
संस्थाओं को नष्ट कर देंगे, खतरनाक गुनहगार बन कर आपकी निंद लूंट लेंगे,
आतंक फेलायेंगे, तब उन्हे खत्म करने के लिए आप गोलियां चलायेंगे, फास्ट
ट्रेक कोर्ट बिठायेंगे, सिक्युरिटिझ के नये उपकरण बसायेंगे, मगर अभी फिलहाल
आप कुछ नहीं करेंगे.
गुरुवार, 16 अगस्त 2012
गुजरात सरकार की वाइब्रन्ट बाल नीति
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| लफ़्फ़ाज़ी में ला-जवाब गुजरात सरकार ने बाल मजदूर को दिया है एक नया शब्द - बाल श्रम योगी. |
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| तो फिर इन बच्चों को बाल श्रम योगी की जगह बाल श्रम कैदी कहेना उचित नहीं होगा क्या ? |
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| भगवान की तरह ये बच्चें सब जगह पर होते है ................................................ |
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| .......................................... गुजरात हाइकोर्ट की केन्टीन में भी |
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| जब श्रम विभाग इन बच्चों को मजदूरी से मुक्त करवाता है, तब उन्हे पुनस्थापन के लिए देता है अगरबत्ती की कीट |
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| और, बाल मजदूरी प्रतिबंध कानून के मुताबिक अगरबत्ती की उत्पादन प्रक्रिया प्रतिबंधित लीस्ट में है और उसमें बाल मजदूों से काम लेना कानूनन अपराध है. |
(स्पष्टता - हमारे ब्लोग पर गुजरात हाइकोर्ट की केन्टीन के इस बाल मजदूर की पोस्ट आने के बाद अब हाइकोर्ट की केन्टीन में ऐसे बाल मजदूर देखे नहीं जाते. अगर आप ऐसा मान लेंगे कि वाइब्रन्ट गुजरात सरकार के प्रगतिशील लेबर डीपार्टमेन्ट ने उस बच्चें का पुनस्थापन करवाया होगा, तो आप गलत सोच रहे है, क्योंक वह बच्चा राजस्थान के डुंगरपुर का था, आदिवासी था, जिनके बारे में खुद गुजरात सरकार नेशनल कमिशन फोर धी प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स की टीम को कह चूकी है कि राजस्थान से आते बच्चों की जिम्मेदारी राजस्थान सरकार की है.)
मंगलवार, 14 अगस्त 2012
जुवेनाइल होम के बच्चों के साथ
| अहमदाबाद के खानपुर इलाके में एक रिमान्ड हॉम है, जो अब ओब्झर्वेशन हॉम के नाम से जाना जाता है. बलात्कार, खून, चोरी जैसे गंभीर गुनाह करनेवाले बच्चें हो या फिर मंदिरो के आगे भीख मांगनेवाले बच्चें हो- सभी को यहां लाया जाता है. चालीस लाख की आबादीवाले शहेर में सिर्फ एक ही हॉम है. जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के मुताबिक यह हॉम गैरकानूनी है. एक्ट के मुताबिक बच्चों की दो केटेगरी है. एक, कानून के साथ संघर्ष में आये हुए बच्चें (children in conflict with law) और दो, सुरक्षा तथा मदद की जरूरतवाले बच्चें (children in need of care and protection). कानून यह भी कहेता है कि इन दोनों केटेगरी के बच्चों को एक साथ रखा न जाय, उनके लिये अलग निवासी व्यवस्था होनी चाहिये. अहमदाबाद के हॉम में दोनों केटेगरी के बच्चें एक ही मकान में, एक ही परिसर में साथ रहते है. कमिशन फोर धी प्रोटेक्शन ऑफ चाईल्ड राईटस (एनसीपीसीआर) की टीम अहमदाबाद आती है और इस हॉम की मुलाकात लेती है मगर परिस्थिति में कोई बदलाव नहीं आता. |
| एक चान्स दिजीए हमें इस देश के बहेतर नागरिक बनने का.......... |
शनिवार, 28 जुलाई 2012
बीटी कोटन के सर्जनात्मक बाल मजदूर
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सुबह पांच बजे से मजदूरी की चक्की में पिसते हाथों ने
थाम लिया रंगो की दुनिया का रोमांच
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यह महज संयोग नहीं था कि ज्यादातर बच्चों ने
कागज़ पर चित्रण किया हाथ का, जो उनके अस्तित्व का
मानो एक पर्याय ही था
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हिन्दु कट्टरपंथी संगठन ऐसे ही बच्चों के हाथ में त्रिशुल
थमाकर नकारात्मक हिंसा के रास्ते पर धकेलते है
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लेकिन उन्हे चाहिए सर्जनात्मक अभिव्यक्ति तथा अपनी
मानवीय गरीमा की पहचान
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बनासकांठा तथा साबरकांठा जिल्लों के बहुत सारे आदिवासी
बहुल गांवों के बच्चे बीटी कोटन की मजदूरी के चपेट में
एक बार आ जाते हैं तो वापस स्कुल नहीं जाते
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इस सर्जनात्मक शिबिर का आयोजन किया था दलित
हक रक्षक मंच तथा आदिवासी सर्वींगी विकास संघ ने
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